रविवार, 24 मई 2020

दया।

दया

        बीमारी के चलते सबने संध्या को काम पर जाने से मना कर दिया था ।  वह बाजार से सामान भी लाकर नहीं रख पाई थी ।
     .      छत के खोखे में बने घोंसले में मनु  चूजों के लिए रोज ही रोटी लेकर जाता था ।
  .          उस दिन माँ ने कहा - " मनु अब आटा खत्म होने वाला है , तो चूजों के लिए चिड़िया दाना ले ही आयेगी , तुम अपनी रोटी खा लेना।"

"ठीक है माँ ।" मनु ने सिर हिला दिया।

       खाना खाते समय मनु ने आधी रोटी जेब में रख ली।  माँ  के सोने के बाद रोटी के छोटे छोटे टुकड़े करके ऊपर चला गया । मनु को देख चूजे चूँ चूँ करने लगे । उसने आधी रोटी उनको खिला दी।रोज यही करता रहा।

           आज सिर्फ एक रोटी मनु के लिए थी । उसके लिए कुछ नहीं था । उसे नींद नहीं आई , करवट ली तो मनु को वहां न देख वह ऊपर गयी तो देखा मनु रोटी के टुकड़े  पानी में भिगो कर चूजों को खिला रहा  था।
          वह चुपचाप नीचे आ गई मनु के मन में जीवों के लिए दया देख उसकी आंखों में आंसू भर आए। 

11 टिप्‍पणियां:

  1. हृदस्पर्शी मार्मिक रचना ,दया ममता हर परिस्थिति में कायम रहती है ,उसे अभाव भी नही मिटा पाती ,बहुत ही सुंदर कथा ,

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  2. आपने बहुत अच्छी पोस्ट लिखी है. ऐसे ही आप अपनी कलम को चलाते रहे. Ankit Badigar की तरफ से धन्यवाद.

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कथानक इसी धरती पर हम इंसानों के जीवन से ही निकले होते हैं और अगर खोजा जाय तो उनमें कभी खुद कभी कोई परिचित चरित्रों में मिल ही जाता है. कितना न्याय हुआ है ये आपको निर्णय करना है क्योंकि आपकी राय ही मुझे सही दिशा निर्देश ले सकती है.