अस्पताल के बाहर कार और बाइक के स्टैंड अलग अलग बने थे और दोनों तरफ वाहन खड़े थे कि इतने में हड़बड़ी में एक साइकिल वाला आया और जल्दी से साइकिल खड़ी करके अंदर की तरफ भागा।
जल्दी में साइकिल डगमगा गयी, बगल में खड़ी बाइक ने उसको घुड़का - 'जरा ठीक से खड़ी रहो , एक तो बीच में आकर खड़ी हो गयी हो और फिर अपने शरीर का बोझ भी नहीं संभाल पा रही हो।'
'हमसे दूर ही रहियो नहीं तो एक बार में ही अंजर पंजर अलग हो जायेंगे। धेले भर की औकात नहीं तो फिर हमारे बीच आकर खड़े होने की क्या तुक? पता नहीं कहाँ कहाँ से चले आते हैं?' दूसरी ओर खड़ी बाइक भी भुनभुनाई।
साइकिल सकुचाई सी खड़ी ही रही क्योंकि उसके पास और कोई चारा नहीं था। एक तो जीर्ण-शीर्ण काया और उस पर बगल में खड़ी दोनों बाइक उससे बहुत ज्यादा ताकतवर थी। इतने में एक स्पोर्ट्स साइकिल पर तेजी से चलता हुआ एक युवक आया और अपनी साइकिल खड़ी करने लगा तो बाइक ने फिर हुँकार भरी - 'कहाँ -कहाँ? दिखाई नहीं देता कि पहले से ये सूखी काया आ खड़ी हुई है। तुम भी, अगर तेजी से स्टार्ट भी हो जाऊँ तो हवा में उड़ जायेगी।'
'आपको शर्म नहीं आती इस तरह से बोलते हुए , मानता हूँ कि ये हमारी पीढ़ी के बुज़ुर्गवार हैं लेकिन उनका अपमान क्यों करना? एक दिन सबका यही हाल होना है।'
'चुप कर बहुत वकालत कर रहा है, होंगे तेरे बुजुर्गवार, हमारे आगे इनकी कोई औकात नहीं है।'
'ये बतलाइये कि पहले कौन आया था ? यही साइकल न, आप का जन्म बहुत बाद में हुआ ? मेरा तो रंग-रूप तो इन्हीं का सुधरा हुआ रूप है, लेकिन मैं इनको इज्जत देता हूँ।'
साइकिल ने बड़ी कातर दृष्टि से उसकी और देखा - नई पीढ़ी ने उसके दर्द को समझ लिया है। अपनी पूरी ठसक के साथ वह खड़ी हुई और साइकिल से पूछा - "क्या बात है बुज़ुर्गवार इतनी मायूसी चेहरे पर क्यों ?'
'कुछ नहीं मैं समझ गया कि मेरा जीवन अब ख़त्म हो चुका है और मुझे जीने का हक़ नहीं है। '
'ऐसा किसने कहा ?'
'इन बगल में खड़ी हुई युवा बाइकों ने। '
'क्यों? अगर युवा आ जाएंगे तो क्या बुज़ुर्गों को रहने का हक़ नहीं है।'
' पता नहीं। ' हताश स्वर में पुरानी साइकिल बोली।
नई पीढ़ी की साइकिल को क्रोध आ गया - 'ए भाई किसने दादाजी को अपशब्द कहें?'
'अबे तू कौन है ? जो इस खटारा की वकालत करने के लिए आ गया?'
'मैं इनका पोता हूँ. आपको इनसे परेशानी क्या है ?'
'इसने मेरे बराबर आकर खड़े होने की जुर्रत कैसे की? मेरे स्टार्ट होने की आवाज़ सुनकर ही लुढ़क जायेगी।'
'बहुत गलतफहमी पाल रखी है , हर नयी पीढ़ी ज्यादा शोध के बाद बनाई जाती है और नए गुणों से युक्त होती है लेकिन पुराने से ग्रहण करके ही उसमें परिष्कार होता है। '
'जाओ जाओ कहे तुम भी साइकिल ही जाओगे कोई बाइक नहीं बन जाओगे।'
'बेशक लेकिन हम अपने सवार की सेहत, पर्यावरण के लिए सुरक्षित और हर व्यक्ति के लिए सहज सुलभ भी हैं।'
'तभी कह रही हूँ कि ये गरीबों की सवारी हमारी बराबरी कैसे कर सकती है?'
'ठीक कहा लेकिन कभी ये अमीरों की सवारी घसीटते हुए मिलेंगे तब बात करूँगा।'
साइकिल सवार वापस आया और साइकिल उठा कर चला गया। उसके बाद सबके सवार अपनी अपनी सवारी लेकर चले गए। कुछ ही अंतराल के बाद हाइवे पर बाइक का पेट्रोल चुक गया और सवार उसको घसीटते हुए जा रहा था। कितने ही उसने औकात वाली बाइक बगल से तेजी से गुजरती रहीं और हाथ हिला कर आगे बढ़ती रहीं।
अचानक स्पोर्ट्स साइकिल आकर बगल में रुकी और बोली - 'मैं आपकी कोई सहायता कर सकती हूँ?' बाइक ने सिर उठा कर देखा और फिर चुपचाप सिर झुका लिया।
